दोस्तों, आप सब जानते ही हैं कि हमारे उत्तर प्रदेश में सड़कें कितनी जरूरी हैं, खासकर जब बात किसानों की फसल दिल्ली पहुंचाने की हो या फैक्टरियों के सामान की ढुलाई की। भारत सरकार की ये Highway योजना, भारतमाला परियोजना, 2017 से चल रही है और मंत्री नितिन गडकरी जी के नेतृत्व में ये गांवों और शहरों को जोड़ने का कमाल कर रही है। अब तक फेज-1 में 26,425 किलोमीटर सड़कें दी गई हैं, जिनमें से 21,248 किलोमीटर बन चुकी हैं, और यूपी में जैसे पूरबांचल एक्सप्रेसवे गाजीपुर से लखनऊ तक चल रहा है, वो किसानों की जिंदगी आसान बना रहा है। ये योजना न सिर्फ समय बचाती है, बल्कि ईंधन भी कम खर्च होता है, और हमारे यहां की कृषि और उद्योग को नई रफ्तार दे रही है।
भाईयो, सोचिए तो सही, हमारे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसा प्रोजेक्ट चित्रकूट से इटावा तक जुड़ रहा है, जो 2025 तक पूरा हो जाएगा और पिछड़े इलाकों में विकास लाएगा। इस Project से Connectivity इतनी मजबूत हो रही है कि गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे से लॉजिस्टिक्स हब बन जाएगा हमारा शहर, और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की अपग्रेड से यात्रा आधी हो जाएगी। विशेषज्ञ कहते हैं कि ये सड़कें आर्थिक विकास की चाबी हैं, यूपी के किसानों की आय बढ़ाएंगी और नौकरियां पैदा करेंगी। कुल मिलाकर, ये नया भारत बनाने का सपना है, जहां हमारा प्रदेश लीडर बनेगा।
परियोजना के प्रमुख उद्देश्य और लाभ
भाईयों-बहनों, हमारे यूपी के गांवों से शहरों तक की दूरी कम करने का सपना ही तो भारतमाला परियोजना का मूल मकसद है। ये योजना राष्ट्रीय राजमार्गों को इतना मजबूत बनाएगी कि माल की ढुलाई का खर्चा आधा हो जाए, और व्यापार को नई उड़ान मिले। सोचिए, आर्थिक गलियारों से लखनऊ को कानपुर या आगरा से जोड़ना, जहां ट्रक तेज रफ्तार से दौड़ें और किसान भाई अपनी गन्ने की फसल मुंबई पहुंचाने में घंटों न लगाएं। सीमावर्ती इलाकों में Security बढ़ाने के लिए खास सड़कें बन रही हैं, ताकि हमारा पूर्वांचल ज्यादा सुरक्षित बने। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले चाचा-चाची अब Infrastructure की बदौलत बाजार तक जल्दी पहुंच सकेंगे, और रोजमर्रा की यात्राएं आसान हो जाएंगी। ये सब 2025 तक 26,000 किलोमीटर आर्थिक कॉरिडोर बनाने का लक्ष्य है, जो देश के 40% माल ढुलाई को संभालेगा।
दोस्तों, ये योजना सिर्फ सड़कें नहीं जोड़ रही, बल्कि आपकी जेब भी मजबूत कर रही है। कम समय में सफर से ईंधन बचेगा, Carbon Emissions घटेंगे, और पर्यावरण को फायदा होगा—हमारे गंगा किनारे के गांवों में साफ हवा आएगी। सरकार कहती है कि इससे लाखों नौकरियां पैदा होंगी, खासकर निर्माण में, जहां यूपी के नौजवान मजदूर भाई काम पाकर घर की जिम्मेदारी निभा सकेंगे। कुल मिलाकर, देश की जीडीपी बढ़ेगी और आम आदमी को सस्ती सुविधाएं मिलेंगी, जैसे कि हब-एंड-स्पोक मॉडल से लॉजिस्टिक्स पार्क्स बनना।
कार्यान्वयन के चरण और रणनीति
भाईयों-बहनों, हमारे यूपी के सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने वाली भारतमाला परियोजना को दो बड़े चरणों में बांटा गया है, ताकि काम व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़े। पहले चरण में कुल 34,800 किलोमीटर सड़कों का लक्ष्य है, जिसमें 26,000 किलोमीटर आर्थिक गलियारे, 8,000 किलोमीटर इंटर कॉरिडोर और 7,500 किलोमीटर फीडर रूट्स शामिल हैं—ये सब 2027 तक पूरा करने का प्लान है। सरकार ने अब तक 796 प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी है, जो 26,425 किलोमीटर लंबे हैं, और फरवरी 2025 तक 19,826 किलोमीटर बन चुके हैं। हमारे यूपी में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसे महत्वपूर्ण खंडों पर काम जोरों पर है, जो गोरखपुर से लखनऊ तक जोड़कर राज्य की Logistics क्षमता को दोगुना कर देगा।
दोस्तों, दूसरे चरण में अतिरिक्त 10,000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण होगा, जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और बंदरगाहों को सीधे जोड़ेगा, जैसे कि नेपाल बॉर्डर से जुड़े रूट्स। इससे Freight Movement इतना आसान हो जाएगा कि लखनऊ या कानपुर जैसे व्यापारिक हब तेजी से फल-फूलेंगे, और माल ढुलाई का खर्चा 10-15 प्रतिशत कम हो जाएगा। कार्यान्वयन में PPP Model का इस्तेमाल हो रहा है, जहां निजी कंपनियां सरकार के साथ मिलकर लागत कंट्रोल रखेंगी। कुल मिलाकर, ये चरणबद्ध रणनीति परियोजना को एकदम सही ट्रैक पर चला रही है।
अब तक की प्रगति और उल्लेखनीय उपलब्धियां
भाईयों-बहनों, सोचिए तो सही, हमारी भारतमाला परियोजना ने दिसंबर 2025 तक कमाल कर दिया है—पहले चरण में 26,425 किलोमीटर अवॉर्डेड प्रोजेक्ट्स में से 21,248 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं, जो कुल 34,800 किलोमीटर लक्ष्य का करीब 61 प्रतिशत है। ये प्रगति बताती है कि सरकार का Infrastructure निवेश असल में फल दे रहा है, और रोजाना 34 किलोमीटर नई सड़कें बन रही हैं। हमारे यूपी में बिहार सीमा से जुड़े कॉरिडोरों पर काम तेज हो गया है, जैसे कि चंदौली से कोलकाता तक का 686 किलोमीटर एक्सप्रेसवे, जो पूर्वांचल को नई जान दे रहा है और स्थानीय व्यापार को बल मिला है। कुल मिलाकर, ये आंकड़े सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि हमारे गांवों की तरक्की में दिख रहे हैं।
दोस्तों, राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई मार्च 2019 के 1,32,499 किलोमीटर से बढ़कर 2025 में 1,46,204 किलोमीटर हो गई है, यानी पिछले पांच सालों में 57,125 किलोमीटर नई सड़कें जुड़ीं, जो Development की रफ्तार को दर्शाती हैं। यूपी जैसे राज्यों में Expressway प्रोजेक्ट्स ने यात्रा समय को आधा कर दिया, जैसे कि आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर अब दिल्ली पहुंचना सिर्फ 4 घंटे का सफर है। कर्नाटक में भी इसी तरह की प्रगति हुई है, लेकिन हमारे यहां के नौजवान मजदूरों को लाखों नौकरियां मिलीं। ये उपलब्धियां आम जनता के अनुभवों में झलक रही हैं—अब फसलें जल्दी बाजार पहुंचती हैं, और परिवारों का सफर सुरक्षित हो गया है।
चुनौतियां, समाधान और भविष्य की दिशा
भाईयों-बहनों, हमारी भारतमाला परियोजना का सफर आसान तो नहीं रहा, खासकर हमारे यूपी के ग्रामीण इलाकों में जहां जमीन अधिग्रहण की समस्या ने कई प्रोजेक्ट्स को लटका दिया। दिसंबर 2025 तक, 637 प्रोजेक्ट्स में देरी हुई, मुख्यतः Land Acquisition मुद्दों और ठेकेदारों की आर्थिक परेशानियों से, जैसे कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में बाढ़ और कोविड जैसी मौसमी बाधाओं ने काम रोका। लेकिन सरकार ने हार नहीं मानी—डिजिटल मॉनिटरिंग से Parvesh पोर्टल को अपग्रेड किया गया, ताकि जंगल और पर्यावरण क्लियरेंस तेज हो, और यूपी में स्थानीय विरोध को सुलझाने के लिए गांव-स्तरीय संवाद आयोजित किए गए, जहां किसान भाइयों को तुरंत मुआवजा देकर विश्वास जीता गया। ये कदम सफल साबित हो रहे हैं, और अब लागत भी नियंत्रित हो रही है, जो पहले 5.35 लाख करोड़ से बढ़कर 10 लाख करोड़ के करीब पहुंच गई थी।
दोस्तों, भविष्य की दिशा तो और भी रोमांचक है—2027-28 तक पहले चरण को पूरा करने का लक्ष्य है, साथ ही 35 Multimodal Logistics Parks विकसित होंगे, जो यूपी के लखनऊ और कानपुर जैसे हब्स को रेल, सड़क और बंदरगाहों से जोड़ेंगे। इससे Innovation को बल मिलेगा, जैसे हब-एंड-स्पोक मॉडल से माल ढुलाई 10-15% सस्ती हो जाएगी, और वैश्विक व्यापार केंद्र बनने का सपना साकार होगा। चुनौतियों के बावजूद, ये समाधान-केंद्रित नीतियां परियोजना को देश की प्रगति का इंजन बनाए रखेंगी, जहां हमारा प्रदेश आगे चलेगा।
निष्कर्ष: सड़कें जो जोड़ेंगी सपनों को हकीकत से
दोस्तों, हमारी भारतमाला परियोजना अब असल में नए भारत की नींव बन चुकी है, जहां मजबूत Connectivity और आर्थिक गलियारे गांवों से शहरों तक विकास की गारंटी दे रहे हैं। दिसंबर 2025 तक, पहले चरण में 26,425 किलोमीटर अवॉर्डेड प्रोजेक्ट्स में से करीब 21,000 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें बन चुकी हैं, जो बताती हैं कि सरकार का विजन यूपी जैसे राज्यों के आम आदमी तक पहुंच रहा है। हमारे पूर्वांचल और बुंदेलखंड के किसान भाई अब फसलें जल्दी बाजार पहुंचा रहे हैं, नौजवान नौकरियां पा रहे हैं, और परिवारों का सफर सुरक्षित हो गया है। ये सड़कें न सिर्फ वाहनों को जोड़ रही हैं, बल्कि लाखों सपनों को हकीकत बना रही हैं—सोचिए, हमारा यूपी Logistics Hub बनकर देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा।
भाईयों-बहनों, अभी सफर बाकी है, चुनौतियां जैसे जमीन अधिग्रहण और देरी हैं, लेकिन 2027-28 तक पूरा होने का लक्ष्य और मल्टीमॉडल पार्क्स की योजना से सब संभव है। पाठकों से अपील है कि स्थानीय स्तर पर सहयोग करें, ताकि ये परिवर्तन तेज हो। अंत में, एक ऐसा भारत जहां हर गांव शहर से जुड़ा हो, हर किसान खुशहाल हो—क्या ये सपना सच नहीं हो सकता? ये Infrastructure ही तो हमारी समृद्धि की कुंजी है, चलो मिलकर इसे साकार करें।
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